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| नौनिहाल का एक दृश्य |
1967 में 'नौनिहाल' नाम से एक हिंदी फीचर फिल्म बनी| स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरु के निधन पर उस फिल्म में श्रधांजलि स्वरुप एक गाना गाया गया "मेरी आवाज़ सुनो"| गायक रफ़ी साहब और लेखक कैफ़ी आज़मी थे|
"मुझको उम्र भर नफरत सी रही अश्कों से
मेरे ख्वाबों को तुम अश्कों में भिगोते क्यूँ हो
जो मेरी तरहाँ जिया करते हैं कब मरते हैं