Friday, November 5, 2010

तीन दिन: चार शिकवे

शिकवा 1: बाहर का पता नहीं पर हिन्दुस्तान की बसों में स्त्रियों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं और उन पर पुरुष का बैठना तब तक वर्जित होता है जब तक कोई भी औरत खड़ी हो| पुणे में ऐसी सीटों पर "स्त्रियांसाठी" लिखा रहता है| मैं बस में सफर कर रहा था और मैंने देखा कि बस का पूरा का पूरा बाँया हिस्सा "स्त्रियांसाठी" से अंकित था| साथ में एक बोर्ड भी लगा था कि यदि किसी पुरुष ने महिला के होते हुए वहाँ बैठने की जुर्रत की तो उसे सौ रूपये से लेकर तीन सौ रूपये तक का जुर्माना हो सकता है| काफी औरतें खड़ी थीं जबकी बहुत से पुरुष उन सीटों पर बैठे थे| और उन औरतों में से किसी ने भी अपने अधिकार के लिए लड़ने की ज़रूरत नहीं समझी|